परिचय
चित्तौड़गढ़ से लगभग 40 किलोमीटर दूर भादसोड़ा/मण्डफिया कस्बे में स्थित श्री सांवलिया जी मंदिर, भगवान कृष्ण के गहरे रंग वाले रूप “सांवलिया सेठ” को समर्पित है। यह मंदिर लाखों श्रद्धालुओं के लिए भक्ति और अध्यात्म का प्रमुख केंद्र है। यहाँ प्रतिदिन भजन, कीर्तन और आरती का आयोजन होता है।
इतिहास
किंवदंती के अनुसार, वर्ष 1840 में भोलाराम गुर्जर नामक ग्वाले ने भादसोड़ा-बागुंड के छापर गाँव में स्वप्न में देखा कि जमीन के नीचे तीन दिव्य मूर्तियाँ दबी हैं। खुदाई करने पर तीनों मूर्तियाँ मिलीं—सभी भगवान कृष्ण की।
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एक मूर्ति मण्डफिया ले जाई गई।
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दूसरी मूर्ति भादसोड़ा में स्थापित की गई।
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तीसरी मूर्ति उसी स्थान पर रखी गई जहाँ वह मिली थी।
मण्डफिया में मूर्ति स्थापना के लिए छोटे मंदिर का निर्माण किया गया और आवश्यक अनुष्ठान संपन्न किए गए। इन तीनों स्थानों पर बने मंदिर आज श्रद्धालुओं के लिए प्रसिद्ध हैं।
मंदिर का महत्व
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यह मंदिर भगवान कृष्ण की काली शिला को समर्पित है।
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भक्तगण यहाँ दर्शन कर अपनी मनोकामना पूरी करने का विश्वास रखते हैं।
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मंदिर के स्थापत्य में राजस्थानी नक्काशी और गुंबदों की सुंदरता देखने को मिलती है।
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जन्माष्टमी और अन्य प्रमुख हिंदू त्यौहार यहाँ विशेष रूप से मनाए जाते हैं।
दर्शन समय
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सुबह: 05:30 – 12:00
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दोपहर विश्राम: 12:00 – 14:30
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शाम: 14:30 – 23:00
टिप्पणी: त्यौहारों और विशेष अवसरों पर दर्शन समय बदल सकता है।
आरती समय
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मंगला आरती: 05:30
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दोपहर विश्राम: 12:00 – 14:30
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शाम की आरती: 20:00 – 21:15
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भजन और कीर्तन: 21:15 – 23:00
टिप्पणी: त्यौहारों के समय आरती का समय बदल सकता है।
कैसे पहुंचें
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सड़क मार्ग: चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग पर, चित्तौड़गढ़ से लगभग 40 किलोमीटर।
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रेलवे: निकटतम स्टेशन चित्तौड़गढ़ (COR), शहर से टैक्सी या बस उपलब्ध।
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हवाई मार्ग: निकटतम हवाई अड्डा उदयपुर का महाराणा प्रताप हवाई अड्डा।
प्रमुख त्यौहार एवं रस्म‑रिवाज
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जन्माष्टमी: भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर विशेष आयोजन।
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होलिका दहन, दिवाली, एकादशी: प्रमुख पर्वों पर उत्सव।
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श्रद्धालु व्यापार और कामकाज में सफलता हेतु विशेष रूप से आते हैं।
यात्रा सुझाव
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सुबह जल्दी दर्शन करना बेहतर है।
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पर्वों के समय भीड़ अधिक होती है, इसलिए योजना पहले से बनाएं।
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मंदिर परिसर में शांति बनाए रखें और मोबाइल का उपयोग संयमित करें।
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मौसम अनुसार यात्रा की तैयारी करें।
निष्कर्ष
श्री सांवलिया जी मंदिर चित्तौड़गढ़, राजस्थान, भक्ति, श्रद्धा और इतिहास का सुंदर संगम है। अगर आप कृष्णभक्ति या राजस्थान की मंदिर संस्कृति का अनुभव करना चाहते हैं, तो यह मंदिर आपकी यात्रा सूची में अवश्य शामिल होना चाहिए।
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